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Jal Sanrakshan Par Nibandh- जल ही जीवन पर निबंध: मानव जीवन में जल का संरक्षण करना बहुत ही आवश्यक है। हमें पता है कि धरती पर पीने योग्य जल कितना है, फिर भी हम इसे दूषित करते ही जा रहे हैं। हमें ऐसा नहीं करना चाहिए।
आइए आज हम पढ़ते हैं जल संरक्षण पर निबंध अलग-अलग शब्द सीमाओं के आधार पर।
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Jal Sanrakshan Par Nibandh- जल ही जीवन पर निबंध
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Jal Sanrakshan Par Nibandh- जल ही जीवन पर निबंध


प्रस्तावना: 

जल मनुष्य के जीवन का प्रमुख साधन है, इसके बिना जीवन की कल्पना नहीं हो सकती। सभी प्राकृतिक वस्तुओं में जल अत्यंत महत्वपूर्ण है। राजस्थान का अधिक भाग मरुस्थल है, जहां जल नाम मात्र को भी नहीं है, इस कारण यहां कभी-कभी भीषण अकाल पड़ता है।

जल संकट के कारण: 

राजस्थान के पूर्वी भाग में चंबल, दक्षिणी भाग में माही के अतिरिक्त कोई विशेष जल स्त्रोत नहीं है, जो जल आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके। पश्चिमी भाग तो पूरा रेतीले टीलों से भरा हुआ निर्जल प्रदेश है जहां केवल इंदिरा गांधी नहर ही एक मात्रा आश्रय है।

राजस्थान में जल संकट के कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं-

  1. भूगर्भ के जल का तीव्र गति से दोहन हो रहा हैं। इससे जल-स्तर कम होता जा रहा है।
  2. पेयजल के स्रोतों का सिंचाई में उपयोग होने से जल संकट बढ़ता जा रहा है।
  3. उद्योगों में जलापूर्ति भी आम लोगों को संकट में डाल रही है।
  4. पंजाब-हरियाणा आदि पड़ोसी राज्यों असहयोगात्मक रवैया भी जल संकट का प्रमुख कारण है।
  5. राजस्थान की प्राकृतिक संरचना ही ऐसी हैं की वर्षा की कमी रहती हैं और यदि वर्षा हो भी जाये तो उसकी रेतीली जमीन में पानी का संग्रहण नहीं हो पता।

निवारण हेतु उपाय: 

राजस्थान में जल संगठन के निवारण हेतु युद्ध स्तर पर प्रयास होने चाहिए। अन्यथा यहां घोर संकट उपस्थित कर सकता है।जैसे सूखा पड़ना आदि |

कुछ प्रमुख सुझाव इस प्रकार है-

  1. भूगर्भ के जल का असीमित दोहन रोका जाना चाहिए।
  2. पेयजल के जो स्रोत है, उनका सिंचाई हेतु उपयोग में किया जाए। मानव की मूलभूत आवश्यकता का पहले ध्यान रखा जाए।
  3. वर्षा के जल को रोकने हेतु छोटे बांधों का निर्माण किया जाए, ताकि वर्षा का जल जमीन में प्रवेश करें और जल स्तर में वृद्धि हो।
  4. पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश की सरकारों से मित्रतापूर्वक व्यवहार रखकर आवश्यक मात्रा में जल प्राप्त किया जाए।

उपसंहार: 

भारत में भूगर्भ जल का स्तर निरंतर गिरता जा रहा है। देश के सर्वाधिक उपजाऊ प्रदेश इस संकट के शिकार हो रहे हैं, फिर राजस्थान जैसे मरुभूमि प्रधान प्रदेशों की भावी जल-संकट की कल्पना ही सिहरा देने वाली है।
अतः जल प्रबंधन हेतु शीघ्र सचेत और सक्रिय हो जाने में ही राजस्थान का कल्याण निहित है।

आशा करते हैं हमारे द्वारा प्रस्तुत किया गया Jal Sanrakshan Par Nibandh आपके मन को भाया होगा।

अगर आपको Jal Sanrakshan Par Nibandh अच्छा लगा तो इसे अपने अन्य दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं कि Jal Sanrakshan Par Nibandh आपको कैसा लगा ?

हमें आपकी टिप्पणी का इंतजार रहेगा। 😊

हम फिर मिलेंगे Jal Sanrakshan Par Nibandh के अगले आर्टिकल में जिसमें हम आपके लिए अलग-अलग शब्द सीमा के निबंध लेकर आएंगे।

चलिए, बहुत जल्द मुलाकात होगी हैं।

अलविदा।


😊आओ अन्य निबंध पढ़ें -

Jal Sanrakshan Par Nibandh- जल ही जीवन पर निबंध

Jal Sanrakshan Par Nibandh- जल ही जीवन पर निबंध: मानव जीवन में जल का संरक्षण करना बहुत ही आवश्यक है। हमें पता है कि धरती पर पीने योग्य जल कितना है, फिर भी हम इसे दूषित करते ही जा रहे हैं। हमें ऐसा नहीं करना चाहिए।
आइए आज हम पढ़ते हैं जल संरक्षण पर निबंध अलग-अलग शब्द सीमाओं के आधार पर।
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Jal Sanrakshan Par Nibandh- जल ही जीवन पर निबंध


प्रस्तावना: 

जल मनुष्य के जीवन का प्रमुख साधन है, इसके बिना जीवन की कल्पना नहीं हो सकती। सभी प्राकृतिक वस्तुओं में जल अत्यंत महत्वपूर्ण है। राजस्थान का अधिक भाग मरुस्थल है, जहां जल नाम मात्र को भी नहीं है, इस कारण यहां कभी-कभी भीषण अकाल पड़ता है।

जल संकट के कारण: 

राजस्थान के पूर्वी भाग में चंबल, दक्षिणी भाग में माही के अतिरिक्त कोई विशेष जल स्त्रोत नहीं है, जो जल आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके। पश्चिमी भाग तो पूरा रेतीले टीलों से भरा हुआ निर्जल प्रदेश है जहां केवल इंदिरा गांधी नहर ही एक मात्रा आश्रय है।

राजस्थान में जल संकट के कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं-

  1. भूगर्भ के जल का तीव्र गति से दोहन हो रहा हैं। इससे जल-स्तर कम होता जा रहा है।
  2. पेयजल के स्रोतों का सिंचाई में उपयोग होने से जल संकट बढ़ता जा रहा है।
  3. उद्योगों में जलापूर्ति भी आम लोगों को संकट में डाल रही है।
  4. पंजाब-हरियाणा आदि पड़ोसी राज्यों असहयोगात्मक रवैया भी जल संकट का प्रमुख कारण है।
  5. राजस्थान की प्राकृतिक संरचना ही ऐसी हैं की वर्षा की कमी रहती हैं और यदि वर्षा हो भी जाये तो उसकी रेतीली जमीन में पानी का संग्रहण नहीं हो पता।

निवारण हेतु उपाय: 

राजस्थान में जल संगठन के निवारण हेतु युद्ध स्तर पर प्रयास होने चाहिए। अन्यथा यहां घोर संकट उपस्थित कर सकता है।जैसे सूखा पड़ना आदि |

कुछ प्रमुख सुझाव इस प्रकार है-

  1. भूगर्भ के जल का असीमित दोहन रोका जाना चाहिए।
  2. पेयजल के जो स्रोत है, उनका सिंचाई हेतु उपयोग में किया जाए। मानव की मूलभूत आवश्यकता का पहले ध्यान रखा जाए।
  3. वर्षा के जल को रोकने हेतु छोटे बांधों का निर्माण किया जाए, ताकि वर्षा का जल जमीन में प्रवेश करें और जल स्तर में वृद्धि हो।
  4. पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश की सरकारों से मित्रतापूर्वक व्यवहार रखकर आवश्यक मात्रा में जल प्राप्त किया जाए।

उपसंहार: 

भारत में भूगर्भ जल का स्तर निरंतर गिरता जा रहा है। देश के सर्वाधिक उपजाऊ प्रदेश इस संकट के शिकार हो रहे हैं, फिर राजस्थान जैसे मरुभूमि प्रधान प्रदेशों की भावी जल-संकट की कल्पना ही सिहरा देने वाली है।
अतः जल प्रबंधन हेतु शीघ्र सचेत और सक्रिय हो जाने में ही राजस्थान का कल्याण निहित है।

आशा करते हैं हमारे द्वारा प्रस्तुत किया गया Jal Sanrakshan Par Nibandh आपके मन को भाया होगा।

अगर आपको Jal Sanrakshan Par Nibandh अच्छा लगा तो इसे अपने अन्य दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं कि Jal Sanrakshan Par Nibandh आपको कैसा लगा ?

हमें आपकी टिप्पणी का इंतजार रहेगा। 😊

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चलिए, बहुत जल्द मुलाकात होगी हैं।

अलविदा।


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